मासिक धर्म कलंक नहीं बल्कि भावी पीढ़ी के सृजन का स्रोत है

Belal Jani
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 जौनपुर।जलालपुर क्रांतिकारी कार्यक्रम 'उड़ान' के दौरान बयालसी महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ अलकेश्वरी सिंह ने महाविद्यालय सभागार में छात्रों के सम्मुख  बताया कि मासिक धर्म कलंक नहीं बल्कि भावी पीढ़ी के सृजन का स्रोत है।कार्यक्रम का शुभारंभ वीणावादिनी मां सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के संचालनकर्ता डॉ संजय नारायण सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर ने कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रथम मासिक धर्म भारत के उत्तर पूर्वी राज्य असम में उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ प्रतिभा सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर ने आए हुए अतिथियों एवं छात्राओं का स्वागत करते हुए मासिक धर्म के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। 
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ अलकेश्वरी सिंह ने अपने उद्बोधन के दौरान बताया कि मासिक धर्म को जागरूकता के अभाव में हौवा के रूप में लिया जाता है।
टीम की ओर से पधारे प्रतिनिधि शबा परवीन ने बताया कि मासिक धर्म के बारे में बालिकाओं को उचित जानकारी न होने से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अतः इस कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं को जागरूक करने का प्रयास किया गया है। 
महिला विशेषज्ञ डॉ विपाशा कौशिक ने मासिक धर्म से जुड़े विभिन्न कुमान्यताओं का खंडन करते हुए इसके वैज्ञानिक पहलुओं को बताया।
कार्यक्रम के अंत में टीम  द्वारा सभी उपस्थित छात्राओं को स्टेफ्री सेनेटरी पैड निःशुल्क प्रदान किया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ अलकेश्वरी सिंह ने सभी आगंतुकों, उपस्थित अध्यापकों, छात्राओं एवं कर्मचारियों का कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। 
उक्त कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग डॉ अनिल कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, समाजशास्त्र द्वारा प्रदान किया गया। 
कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक डॉ बृजेश कुमार मिश्र, डॉ अखिलेश चंद्र सेठ, डॉ जगत नारायण सिंह, डॉ अंशुमान सिंह, डॉ आशुतोष पांडे, डॉ सफीउल्लाह अंसारी, डॉ प्रकाश चंद्र कसेरा, डॉ श्रीकृष्ण सिंह, डॉ प्रदीप यादव, डॉ हिमांशु कुमार, डॉ जितेंद्र प्रसाद यादव, डॉ उज्जवल सिंह एवं स्ववित्तपोषित शिक्षक एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।