जौनपुर। ज़िला मुख्यालय से लगभग 5 किलो मीटर पर स्थित सिरकोनी ब्लाक के पास हौज ट्रामा सेंटर इन दिनों खानापूर्ति का साधन बनकर रह गया है, जहां उत्तर प्रदेश की बाबा योगी आदित्यनाथ कीं सरकार गरीबों को मुफ्त व अच्छे इलाज के लिए लगातार प्रयास कर रही है , वही पर स्वास्थ्य विभाग जिम्मेदार और ट्रामा सेंटर के अधिकारी और कर्मचारी उनके सपने पर पलीता लगाने का कार्य कर रहे है।
ताजा एक मामला हौज ट्रामा सेंटर का प्रकाश में आया है , ट्रामा सेंटर पहुंची बुजुर्ग महिला को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा। बताते चले कि जो गंभीर बीमारियों के लिए क्षेत्र के लोगों की एक उम्मीद और राहत के पैगाम के रूप में ट्रामा सेंटर निर्मित हुआ था। लेकिन आज इसकी कथा एक दम उलट है और हर इंसान को सोचने पर मज़बूर कर देगी।
गुरुवार को हौज ट्रामा सेंटर में गंभीर हालत में एम्बुलेंस से आई हुई एक बुज़ुर्ग महिला ट्रामा सेंटर की सीढ़ियों पर बुरी दशा में उल्टियां कर रही है, परिजन सहारा दे रहे थे लेकिन डॉक्टर, नर्स तथा अन्य सहायक कर्मचारी नदारद थे। जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, परिजनों ने बताया कि जैसे ही हमने प्रवेश किया तो ट्रामा सेंटर के लोगों ने कहा कि केस हमारे दायरे से बाहर है अतः आप लोग कही और ले जायें। इस तरह बिना किसी प्राथमिक उपचार के हमें बाहर कर दिया गया । वहीं सिर में गंभीर चोट के साथ सिटी स्कैन के लिए अस्वस्थ होकर पहुंचे राजेश पाठक ने बताया कि पहले तो डॉक्टर टालमटोल करते रहे। बाद में उन्होंने कहा 'आप जिला अस्पताल से संपर्क कीजिए यहां सिटी स्कैन के लिए न तो कोई डॉक्टर है और न ही कोई टेक्नीशियन ही मौजूद हैं हम लाचार हैं और मदद करने में अक्षम हैं'। इस तरह उन्हें भी कुछ दर्द-निवारक दवाइयां लेकर रुखसत होना पड़ा।
अब सवाल यह उठता है कि ट्रामा सेंटर लोगों के लिए मृग मरीचिका है? क्या इंतजार की घड़ियां समाप्त होंगी? सक्षम लोगों ने सेंटर को नियमानुसार गतिमान बने रहने के लिए कौन-कौन से क़दम उठाए? जनता पूछ रही है 'हमारे दिन कब बहुरेंगे, इस विषय पर ट्रामा सेंटर के अधीक्षक एके सिंह ने रटा रटाया शब्द कहा कि सिटी स्कैन चल रहा है फिलहाल मैं जांच करवाता हूँ, जो गलत होगा उसके खिलाफ कार्यवाही होगी।जो भी हो इस घटना को लेकर ट्रामा सेंटर के सम्बंधित कर्मचारियों के प्रति यही कहना है ट्रामा सेंटर पहुंचे अन्य लोगों का कि लगता है मानवता शून्य हो गई है।